नैनीताल ।
कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल के सेवानिवृत्त मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, पूर्व कर्मचारी संघ अध्यक्ष एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन के चिन्हित आंदोलनकारी नरेन्द्र सिंह रजवार का आज 19 जुलाई 2026 को प्रातः लगभग 10:30 बजे आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन का समाचार मिलते ही कुमाऊँ विश्वविद्यालय परिवार तथा कर्मचारी संगठनों में शोक का माहौल है ।
श्री रजवार कुमाऊँ विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के कई बार अध्यक्ष रहे तथा उन्होंने कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए अनेक संघर्षों का नेतृत्व किया। उनके प्रयासों से विश्वविद्यालय कर्मचारियों को अनेक महत्वपूर्ण सुविधाएँ एवं अधिकार प्राप्त हुए। वे पर्वतीय कर्मचारी संघ के मंडलीय सचिव भी रहे तथा उत्तराखंड के शीर्ष कर्मचारी नेताओं में उनकी विशिष्ट पहचान थी।
वे उत्तराखंड राज्य आंदोलन के चिन्हित आंदोलनकारी थे। पृथक उत्तराखंड राज्य के निर्माण के आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण एवं सक्रिय भूमिका रही, जिसे सदैव सम्मान के साथ याद किया जाएगा। उनका संपूर्ण जीवन कर्मचारियों के अधिकारों, सामाजिक सरोकारों एवं जनहित के कार्यों के लिए समर्पित रहा।
स्वर्गीय श्री रजवार अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र एवं एक पुत्री का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनका आवास हल्द्वानी स्थित त्रिमूर्ति के निकट है। उनका अंतिम संस्कार कल प्रातः 7:00 बजे रानीबाग चित्रशिला घाट में किया जाएगा।
उनके निधन पर कुमाऊँ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दीवान सिंह रावत, प्रभारी कुलसचिव राकेश विश्वकर्मा, उत्तराखंड राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ के मुख्य संरक्षक भूपाल सिंह करायत, महासंघ के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मण सिंह रौतेला, महामंत्री प्रशांत मेहता, डी.एस.बी. परिसर कर्मचारी संघ के अध्यक्ष नंदा बल्लभ पालीवाल, कुमाऊँ विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष मोहित सनवाल, दीपक बिष्ट, मोहन सिंह बिष्ट, गणेश सिंह बिष्ट, प्रो. अतुल जोशी, डॉ. सुरेश डालाकोटी सहित विश्वविद्यालय के समस्त अधिकारियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।
भूपाल सिंह करायत ने अपने शोक संदेश में कहा कि “श्री नरेन्द्र सिंह रजवार का निधन विश्वविद्यालय कर्मचारी आंदोलन एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका संघर्ष, नेतृत्व, सरल व्यक्तित्व और कर्मचारियों के प्रति समर्पण सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। कर्मचारी समाज उनके योगदान को कभी नहीं भूल पाएगा। ।


