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नैनीताल । श्री नयना देवी मंदिर का 139 वां स्थापना दिवस समारोह बुधवार को वैदिक मंत्रोच्चार व विधि विधान के साथ शुरू हो गया । श्री माँ नयना देवी मंदिर अमर उदय ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित हो रहे इस समारोह में आज सुबह अखण्ड रामायण का संगीतमय पाठ भी शुरू हुआ । जिसका पारायण गुरुवार को होगा । गुरुवार को मन्दिर के स्थापना दिवस पर कुलपूजा के बाद हवन यज्ञ,कन्या पूजन और उसके बाद भंडारा होगा । नयना देवी मंदिर के स्थापना दिवस के अवसर पर मन्दिर को भव्य रूप से विद्युत रोशनी से सजाया गया है ।
 मन्दिर ट्रस्ट के अध्यक्ष राजीवलोचन साह ने बताया कि  भंडारे में प्रसाद वितरण हेतु प्रसाद के हजारों पैकेट तैयार किये जा रहे हैं। रामायण पाठ के लिए हल्द्वानी से कलाकारों को बुलाया गया है।  स्थापना दिवस को सफल बनाने में ट्रस्ट के अध्यक्ष राजीव लोचन साह, महेश लाल साह, हेमंत साह, बसंत जोशी, सुरेश मेलकानी आदि जुटे हुए हैं l कोरोना के चलते पिछले 2 सालों से मंदिर का स्थापना दिवस नहीं बनाया जा सका जिसके चलते इस बार स्थापना दिवस को भव्य तरीके से मनाया जा रहा है l स्थापना दिवस के चलते मंदिर में सुबह से भक्त जनों की भीड़ उमड़ी थी ।
 ज्ञात रहे  नैनीताल की खोज होने पर यहाँ के प्रमुख निवासी श्री मोती लाल शाह, जिनका बनाया मकान पिलग्रिम कॉटेज नैनीताल का पहला भवन माना जाता है, ने सरोवर के किनारे श्री माँ नयना देवी का मंदिर बनाया। यह मंदिर वर्तमान बोट हाउस क्लब तथा कैपीटोल सिनेमा के मध्य कहीं अवस्थित था। दुर्भाग्यवश 1880 के भूस्खलन में यह मंदिर नष्ट हो गया। बताया जाता है कि श्री माँ नयना देवी ने श्री मोतीराम शाह के पुत्र श्री अमरनाथ शाह को स्वप्न में उस स्थान का पता बताया जहाँ उनकी मूर्ति दबी पड़ी थी। श्री अमरनाथ शाह ने अपने मित्रों और बांधवों के साथ देवी की मूर्ति का उद्धार किया और नये सिरे से मंदिर का निर्माण किया। वर्तमान मंदिर 1883 में बनकर पूरा हुआ। श्री अमरनाथ शाह के गोलोकवासी होने के बाद उनके पुत्र श्री उदयनाथ और फिर उनके प्रपौत्र श्री राजेन्द्र नाथ साह मंदिर की देखरेख करते रहे। 21 जुलाई 1984 को ‘श्री माँ नयना देवी मंदिर अमर उदय ट्रस्ट’ का गठन होने के बाद मंदिर की व्यवस्था इस न्यास के हाथ में आयी।
श्री माँ नयना देवी मंदिर अमर उदय ट्रस्ट’ मंदिर के विकास तथा भक्तजनों को अधिकाधिक सुविधा देने के लिए दृढप्रतिज्ञ है। नैनीताल जैसे लोकप्रिय नगर का धार्मिक केन्द्र होने के कारण इसका महत्व अत्यधिक है।

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