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नैनीताल । जिला शिक्षा अधिकारी प्राथमिक नैनीताल ए बी चंद ने जिले में एक-डेढ़ साल पूर्व नियुक्त उत्तर प्रदेश से डी एल एड प्रशिक्षण प्राप्त 28 प्राथमिक शिक्षकों को नोटिस जारी कर उनके द्वारा उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश दो राज्यों से स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनाने की वैधता सिद्ध करने को कहा है । इन शिक्षकों पर सेवा से बर्खास्त होने का खतरा है । जिनमें से 25 शिक्षक ओखलकांडा व 3 शिक्षक धारी ब्लॉक में तैनात हैं ।
 जिला शिक्षा अधिकारी प्राथमिक द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि इन 28 शिक्षकों ने
उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखण्ड दो राज्यों के स्थाई निवास के आधार पर डी०एल०एड०/ बी०टी०सी० प्रशिक्षण प्राप्त करने एवं तथ्य छुपाकर राजकीय सेवा में नियुक्ति प्राप्त की है । ये नियुक्तियाँ पिछले वर्ष अगस्त से अप्रैल 2025 तक हुई ।
   नोटिस में कहा है कि उत्तर प्रदेश राज्य से डी०एल०एड०/ बी०टी०सी० प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिये उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है । डी एल एड में प्रवेश के समय होने वाले अभिलेखीय जाँच में अभ्यर्थी को उत्तर प्रदेश में अपने गृह जनपद का सक्षम अधिकारी द्वारा प्रवेश की तिथि तक जारी किया गया निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य था । इससे स्पष्ट है कि इन शिक्षकों द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य से किये गये डी०एल०एड०/ बी०टी०सी० प्रशिक्षण में प्रवेश हेतु उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा प्रदत्त निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया होगा। जिसके आधार उन्हें उत्तर प्रदेश राज्य से डी०एल०एड०/ बी०टी०सी० प्रशिक्षण में सम्मिलित होने की अनुमन्यता प्राप्त हुई। जबकि उत्तराखंड में शिक्षक भर्ती में उत्तराखंड का स्थायी निवासी होना अनिवार्य था।
उक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि इन शिक्षकों द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य के स्थायी निवास के आधार पर डी०एल०एड० / बी०टी०सी० प्रशिक्षण प्राप्त किया गया । किन्तु उत्तराखण्ड राज्य के स्थायी निवास के आधार पर सहायक अध्यापक प्राथमिक के पद पर नियुक्ति हेतु आवेदन किया गया तथा नियुक्ति प्राप्त की गयी। इसलिये एक अभ्यर्थी एक समय में दो राज्यों का स्थायी निवासी किस प्रकार हो सकता है । इस प्रकार इन शिक्षकों ने तथ्यों को छुपाकर या तो डी०एल०एड०/ बी०टी०सी० प्रशिक्षण प्राप्त किया गया अथवा राजकीय सेवा में नियुक्ति प्राप्त की गयी है। यदि एक राज्य का स्थायी निवास सही है तो दूसरे राज्य का स्थायी निवास अवैद्य माना जायेगा। इस प्रकार या तो नियुक्ति को तथ्यों को छुपाकर प्राप्त किया गया अथवा डी०एल०एड०/ बी०टी०सी० प्रशिक्षण तथ्यों को छुपाकर प्राप्त किया गया है। दोनों ही दशा में एक प्रमाण पत्र अवैद्य हो जायेगा जो कि भारतीय दण्ड सहिता की धारा 420 के तहत एक अपराध है।
 जिला शिक्षा अधिकारी प्राथमिक ने इन शिक्षकों से उक्त के सम्बन्ध में अपना पक्ष स्वयं उपस्थित होकर तथ्यों सहित 15 दिन के भीतर उपलब्ध कराने को कहा है। कहा है कि तथ्यों के अभाव में उनके खिलाफ उत्तराखण्ड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 2003 (यथा संशोधित 2010) के संगत प्राविधानों के तहत सेवा बर्खास्तगी की कार्यवाही गतिमान कर दी जायेगी।

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