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महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर उत्तराखंड लौटे भगत सिंह कोश्यारी को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने गांव मोहनरी के काफल खाने का न्यौता दिया है।

 

अपने अंदाज में हरीश रावत ने ट्वीट के जरिए भगतदा को यह भी याद दिलाने की कोशिश की है कि, उनके गांव की सड़क भी मेरे कार्यकाल में बनी ।

 

हरीश रावत ने सोशल मीडिया के माध्यम से ट्वीट करते हुए लिखा है, -भगत दा, हां भगत सिंह कोश्यारी जी से मैंने बहुत सारी बातें सीखी हैं। जब मैं पिथौरागढ़ का सांसद था, जब किसी सार्वजनिक सभा में आरएसएस पर कुछ चोट करता था तो भगत दा मुझको दर्जनों पोस्टकार्ड लिखवा कर गुस्सा जाहिर करवाते थे, संगठन के प्रति निष्ठा । इसलिए मैं जानता हूं मोहनरी में आकर मेरे यहां के काफल खाने के लिए निमंत्रण को ये स्वीकार नहीं करेंगे। मगर भगत दा कभी मुझे रमाडी, मांजखेत, नामती,चेताबगढ़ की नारंगियां, माल्टे और केले खाने बुलाएंगे तो मैं जरूर जाऊंगा। भगत दा गाड़ वाले हैं, धार में काफल होते हैं और गाड़ में केले, मछलियां और इनकी गाड़ में माल्टे और संतरे बहुत अच्छे होते हैं। मैं इस बात का उल्लेख इसलिए कर रहा हूं कि भगत दा के जन्म स्थल और उस क्षेत्र को जोडने वाली सारी सड़कें मेरे ही कार्यकाल में बनी है, चाहे सांसद के तौर पर हो, कांग्रेस के कार्यकर्ता के तौर पर हो या मुख्यमंत्री के तौर पर हो यहां तक कि भगत दा के खाने के लिए सामा में कीवी गार्डन भी हमारी ही सरकार के कार्यकाल से प्रारंभ हुआ।

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मुझसे प्यार रखने वालों ने इस क्षेत्र के अंदर ये कीवी और भुट्टे, दुनिया भर में पहुंचाएं और भगत दा आपकी प्रेरणा लेने वालों ने यहां की खड़िया खोदकर के देशभर में पहुंचाई है। अब आप तय करिए जो रिवर्स पलायन के मधुर स्थान वो खड़िया और बालू खुदान से आगे बढ़ेगी या कीवी, रमाड़ी के माल्टे और मोहनरी के काफलों से ! भगतदा रिसाया जन हं ! मैंकें माल्टा और नारंगी खाणक लिजी आपन गौं जरूर बुलाया ।

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