नैनीताल । उत्तराखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश आलोक कुमार वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पत्र सूचना कार्यालय द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उनका यह इस्तीफा 30 अप्रैल 2026 से प्रभावी माना गया है। सरकार द्वारा 27 मई 2026 को जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि जस्टिस वर्मा ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 217 के खंड (1) के परंतुक (ए) के तहत स्वेच्छा से राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र सौंपते हुए पदमुक्त होने का निर्णय लिया है।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में 16 अगस्त 1964 को जन्मे जस्टिस आलोक कुमार वर्मा की शिक्षा-दीक्षा भी वहीं हुई। उन्होंने वाराणसी के डी.ए.वी. (पी.जी.) डिग्री कॉलेज से स्नातक करने के बाद साल 1985 में हरीश चंद्र पोस्टग्रेजुएट कॉलेज से एलएलबी (एल एल बी) की डिग्री हासिल की। इसके बाद, वह साल 1987 में उत्तर प्रदेश की न्यायिक सेवा (1982 बैच) में शामिल हुए, जहाँ उनकी पहली नियुक्ति झांसी में मुंसिफ सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के पद पर हुई थी। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में अपनी सेवाएं देने के बाद, 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड राज्य के गठन के समय उन्होंने उत्तराखंड न्यायिक सेवा का विकल्प चुना।
उत्तराखंड राज्य में आने के बाद जस्टिस वर्मा ने टिहरी गढ़वाल, चमोली, ऊधमसिंह नगर और देहरादून जैसे महत्वपूर्ण जिलों में जिला जज के रूप में कार्य किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने उत्तराखंड सरकार के प्रमुख सचिव (कानून)-सह-एल.आर. के प्रतिष्ठित पद की जिम्मेदारी भी संभाली। न्यायिक क्षेत्र में उनके बेहतरीन योगदान को देखते हुए, मई 2019 में उन्हें उत्तराखंड हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने 27 मई 2019 को शपथ ली। इसके बाद, मई 2021 में उन्होंने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला था।

उन्होंने 30 अप्रैल को इस्तीफा दिया था । जो 27 मई को मंजूर हुआ है । पिछले 28 दिनों से कोर्ट नहीं आ रहे थे । वे आगामी कुछ माह बाद सेवानिवृत्त होने वाले थे । सरकार द्वारा निकट भविष्य में उनको किसी महत्वपूर्ण टिब्यूनल अथवा आयोग में अहम पद दिए जाने की संभावना जताई जा रही है ।
इधर उत्तराखंड हाईकोर्ट के एक और जज न्यायमूर्ति अशीष नैथानी अगले हफ्ते सेवानिवृत्त हो रहे हैं ।


