नैनीताल । उत्तराखंड हाई कोर्ट ने नैनीताल नगर पालिका को तल्लीताल लेकब्रिज चुंगी वी बारापत्थर चुंगी को ठेके में देने की अनुमति दे दी है । नगर पालिका के प्रार्थना पत्र की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अपने पूर्व के आदेश में संशोधन किया है । पूर्व में हाईकोर्ट ने नगर पालिका से स्वयं व महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लेकब्रिज चुंगी वसूलने का निर्देश दिया था ।
मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई ।
प्रो.अजय रावत की जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान नगर पालिका नैनीताल की ओर से कोर्ट के समक्ष प्रार्थना पत्र देकर लेक ब्रिज चुंगी की पालिका द्वारा की जा रही वसूली से हो रही असुविधाओं का जिक्र किया था ।
कोर्ट ने एसएसपी नैनीताल से कहा है कि पूर्व मे कोर्ट ने टीवी नम्बर की टैक्सी बाईको के संचालन पर रोक लगाई गयी थी। लेकिन उस आदेश का कितना अनुपालन हुआ है। इस पर वे स्थिति से अवगत कराएं। आज मामले मे नगर पालिका नैनीताल के द्वारा कोर्ट मे प्रार्थनापत्र देकर कहा है कि नगर पालिका के आय के साधन सीमित हैं और कर्मचारी भी कम है। जिसकी वजह से वे बारापत्थर, फांसी का गधेरा और लेक ब्रिज की चुंगी चलाने मे असमर्थ हैं। लिहाजा पूर्व के आदेश को संसोधन करके उन्हें इनका ठेके पर दिए जाने की अनुमति दी जाय। जिसपर कोर्ट ने पूर्व के आदेश को संसोधन करते हुए पालिका को यह अनुमति दे दी है। हुई सुनवाई पर कोर्ट से यह भी प्रार्थना की गयी कि पालिका के द्वारा स्थानीय वाहन स्वामियों से भी उतनी चुंगी ली जा रही है जितनी कि बाहरी वाहन स्वामियों से । इसलिए स्थानीय लोगों को इसमें कुछ छूट दी जाय। लेकिन कोर्ट ने इस पर अभी कोई आदेश नही दिया।
पूर्व मे कोर्ट ने नगर पालिका से कहा था कि वे अपनी आय बढ़ाने के लिए खुद चुगियों से टोल टैक्स वसूलें।
मामले के अनुसार नैनीताल निवासी पर्यावरणविद प्रो अजय रावत ने सन 2012 में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि नैनीताल में अवैध निर्माण कार्य हो रहे है। सूखाताल लेक का सुंदरीकरण किया जाय। नैनीताल को इको सेंसटिव जोन घोषित किया जाय। पूर्व में कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए थे कि नैनीताल के सभी नालों से अतिक्रमण हटाया जाए और सूखाताल झील का सुंदरीकरण किया जाय। मामलरोड में भारी वाहन नही चलाए जाएं।


