नैनीताल । उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बड़कोट, उत्तरकाशी के पालिकाध्यक्ष विनोद डोभाल के खिलाफ जिला सत्र न्यायालय में विचाराधीन मुकदमे के ट्रायल पर फिलहाल रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकल पीठ ने याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनने के बाद यह अंतरिम आदेश जारी किया है। न्यायालय ने इस मामले में शिकायतकर्ता प्रवीण रावत को नोटिस जारी कर जल्द से जल्द जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई सर्विस रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद तय की है।
यह पूरा मामला उत्तरकाशी में दर्ज एक प्राथमिकी से जुड़ा है, जिसमें शिकायतकर्ता भाजपा नेता प्रवीण रावत ने आरोप लगाया था कि नदी किनारे अवैध खनन की सूचना पुलिस को देने के कारण नगर पालिकाध्यक्ष विनोद डोभाल उससे रंजिश पाल ली थी। प्रवीण रावत के अनुसार, जब वह पुलिस और नायब तहसीलदार के संरक्षण (एस्कॉर्ट) में जा रहा था, तब विनोद डोभाल व अन्य ने अपनी स्कॉर्पियो कार से उसकी ऑल्टो कार को जानबूझकर टक्कर मार दी और मौके से फरार हो गए।
अदालत में याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह मनगढ़ंत और झूठी कहानी बताया। उन्होंने दलील दी कि जिस वाहन से टक्कर मारने का दावा किया जा रहा है, उसकी निरीक्षण रिपोर्ट (इन्स्पेक्शन रिपोर्ट) में किसी भी तरह के नुकसान या दुर्घटना के निशान नहीं मिले हैं, जो एफआईआर की कहानी को पूरी तरह संदेहास्पद बनाता है।
बचाव पक्ष के वकील ने अभियोजन पक्ष की कहानी पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बेहद अस्वाभाविक है कि पुलिस और नायब तहसीलदार की मौजूदगी में कोई वाहन को टक्कर मारकर आसानी से फरार हो जाए और मौके पर मौजूद पुलिस उन्हें पकड़ न पाए। साथ ही, इस कथित घटना का कोई स्वतंत्र गवाह भी नहीं है। इसके अलावा यह प्रकरण राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित है ।

इन तर्कों को आधार मानते हुए न्यायमूर्ति आलोक महरा ने उत्तरकाशी की कोर्ट में चल रहे ‘सत्र ट्रायल संख्या 06 वर्ष 2026’ की कार्यवाही पर अगली सुनवाई तक स्टे लगा दिया है ।


